केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण शुरू, बीमा शुल्क बढ़ा

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलने से पहले यात्रा की तैयारियों में तेजी आ गई है। पैदल मार्ग पर सवारी और सामग्री ढोने वाले घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण को लेकर पशुपालन विभाग ने 26 से 28 फरवरी तक पहले चरण का रोस्टर जारी कर दिया है। होली के बाद दूसरे चरण का रोस्टर जारी होगा।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि 27 फरवरी को चंद्रापुरी और सिद्धसौड़ तथा 28 फरवरी को घंघासू, बांगर और बक्सीर में पंजीकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिला प्रशासन इस बार लगभग पांच हजार घोड़ा-खच्चरों के संचालन की अनुमति देगा।

स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा अनिवार्य

केदारनाथ पैदल मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़ा-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण, माइक्रोचिपिंग, टैगिंग, रक्त सैंपलिंग और पशु बीमा अनिवार्य किया गया है। मेडिकल प्रमाणपत्र और बीमा दस्तावेज पूरे होने के बाद ही जिला पंचायत पंजीकरण और लाइसेंस जारी करेगी।

बीमा शुल्क को लेकर नाराजगी

राउंलेक क्षेत्र में बीमा शुल्क बढ़ने के कारण घोड़ा-खच्चर संचालकों ने स्वास्थ्य बीमा नहीं कराया। भरत रावत, उमेद रावत, अशोक रावत, प्रदीप रावत और जग्गी बवान ने कहा कि इस बार बीमा राशि दोगुने से अधिक हो गई है और विभाग उन्हें जबरदस्ती बीमा कराने का दबाव बना रहा है। उनका कहना है कि बीमा स्वैच्छिक होना चाहिए।

राउंलेक और मनसूना में पंजीकरण

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊखीमठ डॉ. सतेंद्र सिंह यादव और रुद्रप्रयाग के डॉ. राजीव गोयल ने बताया कि राउंलेक में लगभग 300 घोड़ा-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण कर माइक्रोचिपिंग की गई है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जमा न होने के कारण लाइसेंस जारी नहीं हो सके। वहीं, मनसूना में 172 घोड़ा-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से 143 का बीमा पूरा होने पर लाइसेंस जारी कर दिया गया।

प्रशासन और पशुपालन विभाग की यह कवायद श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा और सामान ढुलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

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