हल्द्वानी। प्रदेश में कक्षा एक में प्रवेश के लिए आयु निर्धारण को लेकर शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत अकादमिक क्षेत्र में एकरूपता की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी और निजी स्कूलों के लिए अलग-अलग प्रविधान लागू होने से अभिभावक और स्कूल संचालक असमंजस में हैं।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के करीब आठ दिन बाद आयु गणना की तिथि में बदलाव किए जाने से स्थिति और जटिल हो गई है। अनुमान है कि कुमाऊं के एजुकेशन हब हल्द्वानी में 300 से अधिक निजी विद्यालयों के करीब 4000 बच्चों के दाखिले पर संकट खड़ा हो सकता है।
30 जून बनाम 1 अप्रैल की तिथि
समग्र शिक्षा उत्तराखंड की ओर से जारी आदेश में आरटीई प्रवेश के लिए 30 जून तक छह वर्ष की आयु पूरी करने की छूट दी गई थी।
नर्सरी से संचालित स्कूलों में संबंधित तिथि तक तीन वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चों के प्रवेश का प्रावधान।
कक्षा एक से संचालित स्कूलों में 30 जून तक छह वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रवेश देने के निर्देश।
इस संबंध में 28 फरवरी 2026 को सीईओ जीआर जायसवाल द्वारा जिला स्तर पर पत्र भी जारी किया गया था। इसी आधार पर सामान्य प्रवेश भी किए गए।
हालांकि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष की आयु 1 अप्रैल तक पूरी होना अनिवार्य बताया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में कुछ बच्चों की आयु संबंधी समस्या को देखते हुए 30 जून की छूट दी गई थी, जबकि निजी स्कूलों में 1 अप्रैल की तिथि लागू रहेगी।
आरटीई प्रवेश भी प्रभावित
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 24 मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकारी पत्र में 30 जून की तिथि स्पष्ट होने के कारण अभिभावकों ने उसी आधार पर आवेदन किए थे और पोर्टल की सेटिंग भी उसी अनुसार की गई थी।
अब आयु निर्धारण में बदलाव से आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में दिक्कतें आने की संभावना जताई जा रही है।
स्कूल संचालकों ने उठाए सवाल
पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत ने कहा कि पहले 30 जून तक छह वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रवेश देने का आदेश जारी किया गया और उसी आधार पर प्रवेश हो चुके हैं। अब ऐसे बच्चों का भविष्य अधर में है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक समान नियम होना चाहिए।
वहीं, माध्यमिक शिक्षा की प्रभारी निदेशक कंचन देवराड़ी ने स्पष्ट किया कि एनईपी में छह वर्ष की आयु 1 अप्रैल तक पूर्ण होना अनिवार्य है। सरकारी स्कूलों में विशेष परिस्थितियों के चलते 30 जून तक छूट दी गई है, जबकि निजी स्कूलों में 1 अप्रैल की तिथि लागू रहेगी।
एक राज्य, दो नियम
एक ही राज्य में प्रवेश के लिए दो अलग-अलग आयु मानदंड लागू होने से शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और एकरूपता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावक अब यह जानना चाहते हैं कि पहले से प्रवेश ले चुके बच्चों का भविष्य क्या होगा और क्या सरकार इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगी।