उत्तराखंड। आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) प्रणाली स्थापित करने की योजना फिलहाल जमीन की उपलब्धता के अभाव में अटकी हुई है। ऐसे में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्थायी प्री-फेब संरचना के माध्यम से एटीसी व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष केदारनाथ और उत्तरकाशी में हुए दो हेलीकॉप्टर हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद शासन ने संवेदनशील हेली रूट पर एटीसी प्रणाली अनिवार्य करने की प्रक्रिया शुरू की थी। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के तेजी से बदलने के कारण उड़ानों की निगरानी और नियंत्रण बेहद जरूरी माना जा रहा है।
यात्रा शुरू होने से पहले चालू होंगे अस्थायी एटीसी
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के सीईओ डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही केदारनाथ और बदरीनाथ में अस्थायी एटीसी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। भूमि चयन और हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थायी ढांचा तैयार किया जाएगा।
हेमकुंड साहिब और गंगोत्री जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। वर्तमान में उत्तराखंड में 12 हेलीपोर्ट और 118 हेलीपैड संचालित हैं।
केदारनाथ हेली सेवा का किराया आज हो सकता है जारी
यूकाडा ने केदारनाथ हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। मंगलवार को हेली सेवाओं का किराया जारी किया जा सकता है, जिसके बाद टिकट बुकिंग शुरू होगी।
गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा के नौ हेलिपैड से हेली सेवा संचालित की जाएगी। सीईओ डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि कंपनियों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही अलग-अलग हेलिपैड से उड़ानों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
टिकट बुकिंग आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से की जाएगी। किराया तय होने और कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद ही बुकिंग स्लॉट की तिथि घोषित की जाएगी।