चारधाम यात्रा: परिवहन विभाग सतर्क, ग्रीन कार्ड अनिवार्य—बिना कार्ड नहीं चलेगा कोई भी वाहन

हरिद्वार। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। यात्रा पर जाने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड सोमवार से बनाए जाएंगे। हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित आरटीओ कार्यालय में परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा इस व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

परिवहन विभाग ने यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस वर्ष यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है और 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

तीन स्थानों पर ग्रीन कार्ड की सुविधा

वाहन स्वामियों की सुविधा के लिए विभाग ने तीन स्थानों, हरिद्वार,ऋषिकेश, नरसन बोर्डर पर ग्रीन कार्ड केंद्र स्थापित किए हैं।

इन केंद्रों पर वाहन के सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही ग्रीन कार्ड जारी किया जाएगा।

दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य

ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, परमिट और चालक के लाइसेंस सहित सभी जरूरी दस्तावेजों की सख्ती से जांच की जाएगी। बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी कॉमर्शियल वाहन को यात्रा मार्ग पर संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।

केदारनाथ मंदिर मार्ग पर बर्फ हटाने का कार्य जारी

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले शासन-प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। खराब मौसम के बीच लोक निर्माण विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य कर रही हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मार्ग को समय पर सुगम बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटन सीजन में गैस की मांग बढ़ने की आशंका

चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चलते देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों में रसोई गैस की मांग में बढ़ोतरी होने की संभावना है। पहले से जारी गैस आपूर्ति दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

गर्मी शुरू होते ही प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, ऋषिकेश, सहस्त्रधारा और चकराता में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन क्षेत्रों के होटल, होम-स्टे और ढाबों में व्यावसायिक और घरेलू गैस सिलेंडरों की खपत में इजाफा हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऋषिकेश और चकराता जैसे क्षेत्रों में यात्रियों के पड़ाव के कारण गैस की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसे में गैस एजेंसियों और संबंधित विभागों के सामने अगले दो महीनों तक आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती

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