उत्तराखंड। देशभर में बढ़ते एलपीजी संकट का असर अब उत्तराखंड में भी साफ दिखाई देने लगा है। राज्य में घरेलू और कॉमर्शियल रसोई गैस की भारी किल्लत से आम लोगों के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो देहरादून की कई गैस एजेंसियों पर ताले लगने की नौबत आ सकती है।
बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही डिलीवरी
गैस की कमी के कारण कई एजेंसियां बुकिंग के एक सप्ताह बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं कर पा रही हैं। उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
देहरादून में करीब 19 हजार कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं और रोजाना लगभग 1700 सिलेंडरों की मांग रहती है। हालांकि कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने के कारण एजेंसियों ने होटल और रेस्टोरेंट को सिलेंडर देना बंद कर दिया है। फिलहाल केवल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर सीमित गैस आपूर्ति की जा रही है।
12 सिलेंडर का कोटा पूरा होने पर नई गैस नहीं
गैस कंपनियों द्वारा नियमों में किए गए बदलावों ने भी उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नए नियमों के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में उपभोक्ताओं को केवल 12 रियायती गैस सिलेंडर ही मिलते हैं।
पहले ई-केवाईसी करवाने पर उपभोक्ताओं को तीन अतिरिक्त सिलेंडर की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं ने 1 अप्रैल 2025 से अब तक अपने 12 सिलेंडरों का कोटा पूरा कर लिया है, उन्हें अगला सिलेंडर नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले नहीं मिलेगा।
नए नियमों के बाद बढ़ी सख्ती
नए नियमों की सख्ती के चलते गैस एजेंसियां निर्धारित कोटा से अधिक सिलेंडर जारी नहीं कर पा रही हैं। इससे कई परिवारों की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है और लोग वैकल्पिक व्यवस्था करने को मजबूर हो रहे हैं।
जल्द सामान्य होंगे हालात: डीएसओ
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि रसोई गैस की आपूर्ति में फिलहाल कमी है और विभाग बैकलॉग कम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि कॉमर्शियल गैस की सप्लाई फिलहाल बंद है, इसलिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताते हुए कहा कि जल्द ही गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो जाएगी।