दिल्ली-एनसीआर ट्रक हड़ताल का उत्तराखंड में असर, तीन दिन थमेंगे 5 हजार ट्रकों के पहिए

देहरादून। दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर अब उत्तराखंड में भी दिखाई देगा। राज्य के ट्रांसपोर्टरों ने भी इस हड़ताल को समर्थन देने का ऐलान किया है, जिसके चलते गुरुवार से करीब 5 हजार ट्रकों का संचालन प्रभावित रहेगा। इससे माल ढुलाई, उद्योगों और फल-सब्जियों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

क्यों हो रही है हड़ताल?

अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के बैनर तले दिल्ली-एनसीआर की ट्रक यूनियनों ने माल वाहनों पर बढ़ाए गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क और बीएस-4 व उससे पुराने वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के विरोध में हड़ताल का ऐलान किया है। ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान दिल्ली-एनसीआर में ट्रकों की एंट्री बंद रखी जाएगी।

उत्तराखंड के ट्रांसपोर्टरों ने दिया समर्थन

ऑल उत्तराखंड मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र नेगी ने कहा कि राज्य के ट्रांसपोर्टर भी आंदोलन का समर्थन करेंगे और हड़ताल के दौरान कोई ट्रक दिल्ली नहीं जाएगा।

एआईएमटीसी के प्रदेश महामंत्री आदेश सैनी और उपाध्यक्ष एपी उनियाल का कहना है कि पहले से ही डीजल और टोल टैक्स की मार झेल रहे ट्रांसपोर्टरों पर अब पुराने वाहनों की एंट्री बंद करने का अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है।

उद्योगों और सप्लाई चेन पर असर

देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, सितारगंज और सेलाकुई जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना हजारों ट्रक दिल्ली आते-जाते हैं। हड़ताल के चलते फैक्ट्रियों के लिए कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के स्टेट कॉर्डिनेटर अनिल मारवाह ने बताया कि प्लास्टिक दाना, दवाइयों का कच्चा माल और अन्य जरूरी सामान दिल्ली से ही आता है। ऐसे में तीन दिन तक ट्रांसपोर्ट बंद रहने से उत्पादन और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ेगा।

फल-सब्जियों की किल्लत की आशंका

दिल्ली-एनसीआर की मंडियों से उत्तराखंड में बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां आती हैं। वहीं उत्तराखंड से भी सब्जियां दिल्ली भेजी जाती हैं। हड़ताल के चलते बाजारों में फल-सब्जियों की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

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