फायर सीजन शुरू होते ही उत्तराखंड में भड़की वनाग्नि, दर्जनों घटनाएं सामने, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में घटना शून्य

उत्तराखंड। उत्तराखंड में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रदेश में फायर सीजन शुरू होने के बाद अब तक 73 वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि कुमाऊं क्षेत्र के जंगलों में भी आग की घटनाएं हुई हैं, लेकिन वन विभाग की वेबसाइट पर इन घटनाओं का आंकड़ा शून्य दिखाया जा रहा है।

सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण जंगल काफी शुष्क हो गए हैं। ऐसे में जंगलों में आग लगने का खतरा और अधिक बढ़ गया है। बढ़ते तापमान के साथ वनाग्नि की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से 14 फरवरी तक प्रदेश में जंगलों में आग लगने की 61 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं में करीब 42 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा था।

27 दिनों में 73 घटनाएं

15 फरवरी से 13 मार्च के बीच मात्र 27 दिनों में जंगलों में आग लगने की 73 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें गढ़वाल क्षेत्र में 70 और वन्यजीव क्षेत्र में तीन घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 36 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा को क्षति पहुंची है।

कुमाऊं क्षेत्र के आंकड़ों पर सवाल

वन विभाग की वेबसाइट के अनुसार नवंबर से मार्च तक कुमाऊं क्षेत्र में जंगलों में आग की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई है। जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। 12 मार्च को अल्मोड़ा जिले के मटेला क्षेत्र के जंगल में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिस पर दमकल विभाग की टीम ने काबू पाया।

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